कंप्यूटर कैबिनेट क्या है ? किस काम में आता है ? कोनसे पार्ट होते है ?

कंप्यूटर कैबिनेट क्या है ?किस काम में आता है ?

कोनसे पार्ट होते है ? 

हेलो दोस्तों, कंप्यूटर कैबिनेट क्या है ? किस काम में आता है ? कैबिनेट में कोनसे पार्ट होते है ? इसके बारे में आज हम जानेंगे. दोस्तों, हम सब जानते है की आज का युग यह कंप्यूटर का युग है. और देखा जाये तो ऐसा है भी क्योकि कंप्यूटर ने हमारे कितने सारे काम आसान जो कर दिए है. तो आज हम कंप्यूटर सिस्टम में कैबिनेट क्या होता है  यही जानेंगे.



कंप्यूटर कैबिनेट क्या है ? 

दोस्तों, कंप्यूटर सिस्टम में मॉनिटर, कीबोर्ड और माउस को छोड़कर बाकि सब पार्ट जिस बॉक्स में कनेक्ट किये जाते है उसे कैबिनेट कहते है कई बार इसे Case भी कहा जाता है . मदरबोर्ड (Motherboard), प्रोसेसर (Processor), एसएमपीएस (SMPS), फ्लॉपी ड्राइव (Floppy Drive), डेटा केबल (Data Cable) और बाकि जरूरी पार्ट इसी कबीनै में होते है. कंप्यूटर ON/OFF का मैं पावर स्विच भी इसी कैबिनेट में लगा होता है. संक्षेप में कहे तो कैबिनेट का मतलब किसी भी असेम्बल किये हुए कंप्यूटर का बाहरी बॉक्स होता है. कैबिनेट के मुख्यता दो प्रकार होते है: १. डेस्कटॉप टाइप कैबिनेट  २. टावर टाइप कैबिनेट 

1. डेस्कटॉप टाइप कैबिनेट:

डेस्कटॉप टाइप कैबिनेट में कंप्यूटर का मॉनिटर कैबिनेट के ऊपर रखा हुआ होता है. इस प्रकार के कैबिनेट हमेशा Horizontal  अवस्था में होते. लेकिन इस प्रकार के कैबिनेट का उपयोग १९९५ से काम हो गया है.

2. टॉवर टीपर कैबिनेट :

लगभग १९९५ से १९९८ में पेंटियम माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग ज्यादा स्तर पर होने लगा था | पेंटियम माइक्रोप्रोसेसर जिस मोठेर्बोर्ड पर लगाया जाता है उसका आकर बड़े होने के कारन कैबिनेट की साइज भी बड़ी हो गयी थी .

टावर टाइप के कैबिनेट में कंप्यूटर ON/OFF करने का बटन दिया होता है, कंप्यूटर स्टार्ट करने के लिए यह Switch का उपयोग किया जाता है. कंप्यूटर बंद करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट विंडोज में Shut Down की कमांड दिया गया होता है. लेकिन कैबिनेट में Reset बटन होता है जिसकी सहायता से कंप्यूटर चालू होते समय भी आप कंप्यूटर को Restart कर सकते है.

Connectors (कनेक्टर्स):

कंप्यूटर सिस्टम में कैबिनेट के पिछले हिस्से में अलग अलग स्विचेस और कनेक्टर्स दिए होते है. जिसमे स्विचेस का उपयोग पावर ट्रांसफर के लिए किया जाता है और कनेक्टर का उपयोग अलग अलग डिवाइस जोड़ने के लिए किया जाता है.

कॉम्पटर में लगने वाले डिवाइस:
1. मॉनिटर
2. कीबोर्ड
3. माउस
4. स्पीकर 
5. प्रिंटर
6. माइक
7. स्कैनर 
यह डिवाइस कनेक्ट करने के लिए कैबिनेट में अलग अलग कनेक्टर दिए होते है, जिन्हे पोर्ट (Port) कहा जाता है. माउस और कीबोर्ड जैसी देवीकेस कनेक्ट करने के लिए आग अलग पोर्ट की जरुरत होती है. 
उदहारण: हमारे घर के दिवार पर जो बिजली का स्विच होता है उसे फीमेल कनेक्टर कहते है और जो पिन हम बोर्ड में लगते है उसे मेल कनेक्टर कहते है. जैसे हमारे घर के स्विचेस में मेल & फीमेल कनेक्टर होते है वैसे ही कंप्यूटर में भी मेल और फीमेल प्रकार के कनेक्टर होते है.

a) DIN Connector (डिन कनेक्टर):

Din Connector

Din  का मतलब Deutsche Industry Norm होता है. इस कनेक्टर का सबसे पहले उपयोग जर्मनी में किया गया था. यह कनेक्टर का आकार गोल होता है और यह कनेक्टर कीबोर्ड की केबल में किया जाता है. 

b) PS/2 Port (PS/2 पोर्ट):

PS/2
PS/2 (पर्सनल सिस्टम / 2) पोर्ट, जिसे माउस पोर्ट या कीबोर्ड पोर्ट के रूप में भी जाना जाता है, इस पोर्ट को IBM द्वारा विकसित किया गया था। PS/2 पोर्ट एक मिनी DIN प्लग होती है जिसमें 6 पिन होते हैं और यह कनेक्टर कीबोर्ड और माउस की केबल में दिया होता है. 

c) Serial Port (सीरियल पोर्ट):


सीरियल पोर्ट का उपयोग डाटा ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है. जिसकी मदद से एक बिट के बाद एक ऐसे सीरियल में भेजा जाता है. सीरियल पोर्ट को RS - 232 भी कहा जाता है. जिसमे 9 पिन का कनेक्टर का उपयोग किया जाता है. 

d) Parallel Port (पैरेलल पोर्ट):
पैरेलल पोर्ट का उपयोग डाटा ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है. जिसकी मदद से 8 बिट डाटा को एक साथ भेज सकते है.  
सीरियल पोर्ट की तरह ही पैरेलल पोर्ट भी मदरबोर्ड पर बने होते हैं, जिसमे 25 पिन (DB25) का कनेक्टर का उपयोग किया जाता है.

e) Speaker Jack & Mic Jack (स्पीकर जैक & माइक जैक):

स्पीकर और माइक के कनेक्शन के लिए इस पोर्ट का उपयोग होता है. यह कनेक्टर 3.5 mm का होता है.
 
f) USB Port (USB पोर्ट):

USB को Universal Serial Bus कहा जाता है. USB पोर्ट की मदद से डाटा ट्रांसफर करने में मदद होती है जैसे की पेन ड्राइव और मेमोरी कार्ड या की भी मोबाइल को उसब पोर्ट कनेक्ट आरके भी आप डाटा ट्रांसफर कर सकते है. USB कनेक्टर माउस, कीबोर्ड, प्रिंटर, स्कैनर और अलग अलग डिवाइस की केबल में इस्तेमाल होता है.

Types of USB Port (USB पोर्ट के प्रकार):
1. USB 1.1 
2. USB 2.0 
3. USB 3.0 & USB 3.1 (Gen 1)
4. USB 3.0 & USB 3.1 (Gen 2)

USB Port & Speed of USB :

USB Port                                                               Speed
1. USB 1.1                                            -              12 Mbps
2. USB 2.0                                            -           480 Mbps
3. USB 3.0 & USB 3.1 (Gen 1)           -                5 Gbps
4. USB 3.0 & USB 3.1 (Gen 2)           -              10 Gbps 

g) Firewire Port (फायर-वायर पोर्ट):

Firewire पोर्ट जिसे सीरियल बस भी कहा जाता है. Firewire पोर्ट का स्पीड नर्मल USB से ३० गुना अधिक होता है. इस पोर्ट का standard (निकष) IEEE (Institute of Electrical and Electronics Engineers) द्वारा निश्चित किया गया था. और इसे IEEE1394 यह नाम दिया गया. 

Firewire पोर्ट का सबसे पहले उपयोग Apple कम्पनी द्वारा किया गया था. यह पोर्ट इतना शक्तिशाली होता है की , इसके एक पोर्ट की सहायता से ४०० Mbps का डाटा ट्रांसफर किया जाता है. इस पोर्ट को जोड़ने के लिए Firewire का एक कार्ड मोठेर्बोर्ड के एक्सपांशन स्लॉट में जोड़ने की जरुरत होती है. 

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